नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स संवाद 2026’ के समापन अवसर पर देश की युवा शक्ति में नया जोश भर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि 2047 के स्वर्णिम भारत का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि ‘अमृत पीढ़ी’ के साहस और नवाचार से होगा।
नीतिगत जड़ता का अंत, संभावनाओं का उदय
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में अतीत और वर्तमान का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि 2014 से पहले का भारत लालफीताशाही और नीतिगत अपंगता का शिकार था, जहाँ युवाओं की प्रतिभा जटिल सरकारी प्रक्रियाओं में उलझकर रह जाती थी। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि आज का युवा इस बोझ से मुक्त है। पीएम ने कहा, “जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री की शपथ ली थी, तब आज के कई युवा मतदाता पैदा भी नहीं हुए थे, लेकिन उनके सामर्थ्य पर मेरा विश्वास तब भी उतना ही था और आज भी अटूट है।”
स्टार्टअप और डिफेंस में भारत का डंका
पीएम मोदी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम में आई क्रांति का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी स्टार्टअप शक्ति बन चुका है। अंतरिक्ष और रक्षा जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा:
- स्पेस सेक्टर: स्काईरूट एयरोस्पेस और अग्निकुल कॉसमॉस जैसे स्टार्टअप्स ने साबित किया है कि युवा अब अंतरिक्ष की ऊंचाइयां छूने के लिए तैयार हैं।
- डिफेंस: एक हजार से अधिक डिफेंस स्टार्टअप्स आज एआई-पावर्ड कैमरे, रोबोटिक्स और एंटी-ड्रोन सिस्टम बनाकर सेना को सशक्त कर रहे हैं।
- ड्रोन तकनीक: सरल नियमों ने युवाओं के लिए इस क्षेत्र में संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं।
‘ऑरेंज इकोनॉमी’ और कौशल विकास पर जोर
प्रधानमंत्री ने एक नए आर्थिक युग—‘ऑरेंज इकोनॉमी’ का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि डिजिटल इंडिया ने संस्कृति, रचनात्मकता और तकनीक को जोड़कर कंटेंट क्रिएशन, गेमिंग और म्यूजिक के क्षेत्र में भारत को ग्लोबल हब बना दिया है। इसके साथ ही, ‘PM SETU’ जैसी योजनाओं के जरिए आईटीआई को अपग्रेड कर युवाओं को ‘इंडस्ट्री 4.0’ के लिए तैयार किया जा रहा है।
मानसिक गुलामी से मुक्ति का आह्वान
लेख के सबसे प्रेरणादायक हिस्से में प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक विरासत पर प्रहार किया। उन्होंने कहा कि मैकाले की शिक्षा नीति ने जो ‘हीन भावना’ भारतीयों में पैदा की थी, उसे अब जड़ से उखाड़ने का समय है। उन्होंने वेदों के मंत्र “आनो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वतः” (सभी दिशाओं से शुभ विचार आएं) का उल्लेख करते हुए कहा कि हमें वैश्विक ज्ञान तो अपनाना है, लेकिन अपनी जड़ों और भारतीय मूल्यों पर गर्व करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
निष्कर्ष: 2047 की सामूहिक आकांक्षा
प्रधानमंत्री ने युवाओं को भरोसा दिलाया कि सरकार जीएसटी सुधारों से लेकर टैक्स राहत तक, हर मोर्चे पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने युवाओं को शारीरिक रूप से फिट रहने, खुश रहने और निडर होकर आगे बढ़ने का मंत्र दिया। यह कार्यक्रम इस बात का प्रमाण था कि भारत की विकास यात्रा अब रुकने वाली नहीं है, क्योंकि इसकी बागडोर एक ऐसी पीढ़ी के हाथों में है जो सपने देखना और उन्हें पूरा करना बखूबी जानती है।
