नई दिल्ली। संविधान दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित करते हुए भारतीय संविधान के गौरवशाली इतिहास, इसकी शक्ति और वर्तमान भारत के निर्माण में इसकी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि 26 नवंबर हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि इसी दिन 1949 में संविधान सभा ने देश के संविधान को अंगीकार किया था। वर्ष 2015 में NDA सरकार ने इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का संविधान एक पवित्र दस्तावेज है, जिसने देश को विकास और लोकतंत्र के मार्ग पर आगे बढ़ने की निरंतर प्रेरणा दी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि संविधान की ही शक्ति है जिसने एक साधारण परिवार से निकले व्यक्ति को देश का प्रधानमंत्री बनने का अवसर दिया। उन्होंने संसद भवन की सीढ़ियों पर पहली बार सिर झुकाकर नमन करने और संविधान को सिर माथे लगाने के अपने अनुभव भी साझा किए।
पीएम ने संविधान निर्माण में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान सभा के सभी सदस्यों—विशेषकर महिला सदस्यों—के ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने ‘संविधान गौरव यात्रा’ का आयोजन किया था, जिसमें संविधान की प्रति को हाथी पर रखकर सम्मानपूर्वक यात्रा निकाली गई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान के 75 वर्ष पूरे होना सरकार के लिए विशेष अवसर था, जिसके तहत संसद का विशेष सत्र आयोजित हुआ और देशव्यापी जागरूकता अभियान चलाया गया।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष का संविधान दिवस सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, वंदे मातरम् के 150 वर्ष और गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान वर्ष की वजह से और भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल के नेतृत्व की प्रेरणा ने ही सरकार को अनुच्छेद 370 हटाने का साहस दिया, जिससे जम्मू-कश्मीर में अब पूरी तरह से भारतीय संविधान लागू है।
पीएम ने आर्टिकल 51A में वर्णित मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों के कर्तव्य ही देश की प्रगति का असली मार्ग हैं। महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हैं, अधिकार स्वतः प्राप्त हो जाते हैं।
भविष्य की ओर संकेत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 में देश आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा और 2049 में संविधान निर्माण के 100 वर्ष पूरे होंगे। इसलिए आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करेंगे। विकसित भारत के निर्माण के लिए हर नागरिक को राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा।
उन्होंने मतदान को जनता का सबसे बड़ा अधिकार बताते हुए 18 वर्ष के हो रहे युवाओं के लिए 26 नवंबर को स्कूलों और कॉलेजों में विशेष सम्मान समारोह आयोजित करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रथम बार मतदाता बनने वाले युवाओं में गर्व और जिम्मेदारी का भाव जगाना लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
अंत में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से संविधान दिवस पर कर्तव्यनिष्ठ नागरिक बनने का संकल्प दोहराने की अपील की और कहा कि इसी मार्ग पर चलकर हम एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण कर सकते हैं।
