पाटन (उन्नाव)। हिन्दू–मुस्लिम एकता की मिसाल तकिया मेला 11 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। मेले की शुरुआत परंपरा के अनुरूप इस वर्ष भी जिलाधिकारी द्वारा मोहब्बत शाह बाबा की मजार पर चादरपोशी और सहस्र लिंगेश्वर महादेव मंदिर में विधि-विधान से पूजन-अर्चन के साथ की जाएगी। दोनों धार्मिक स्थलों पर एक साथ होने वाली यह औपचारिकता वर्षों से गंगा-जमुनी तहजीब और साम्प्रदायिक सौहार्द की अनूठी पहचान बनी हुई है।
मेले की तैयारियां जारी हैं, लेकिन मुख्य प्रवेश द्वार की उपेक्षा इस बार भी चर्चा का विषय बनी हुई है। मेले की शान माना जाने वाला यह प्रवेश द्वार लगातार दूसरे वर्ष रंगाई–पुताई से वंचित है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व एसडीएम क्षितिज कुमार द्विवेदी के कार्यकाल में गेट का रंग-रोगन कराया जाता था और आकर्षक इलेक्ट्रिक लाइटों से सजावट की जाती थी। उस समय गेट की सुंदरता मेले की भव्यता बढ़ाते हुए आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती थी।
दुकानदारों और आसपास के लोगों का आरोप है कि गेट की ओर ध्यान न देना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। उनका कहना है कि जब तकिया मेला दोनों समुदायों की एकता और परंपरा का दर्पण है, तो उसका मुख्य प्रवेश द्वार भी उसी गरिमा और साज-सज्जा का प्रतिबिंब होना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों ने जिल प्रशासन से मुख्य गेट की तत्काल रंगाई-पुताई कराने और उसे आकर्षक स्वरूप देने की मांग की है, ताकि मेले की पारंपरिक पहचान और सांस्कृतिक चमक बरकरार रह सके।
मेले का शुभारंभ नजदीक होने के चलते अब उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन गेट की बदहाल स्थिति पर जल्द कार्रवाई करेगा, जिससे आगंतुकों को बेहतर व्यवस्था और सुव्यवस्थित माहौल मिल सके।
