लखनऊ। सोमवार को लखनऊ जिम्मेदार और समावेशी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर राष्ट्रीय और वैश्विक विमर्श का प्रमुख केंद्र बना। यहां उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 के साथ-साथ आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए एआई पर वैश्विक कार्य समूह (AI for Economic Growth and Social Good Working Group) की चौथी बैठक आयोजित की गई। इन आयोजनों का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा इंडियाएआई के सहयोग से उत्तर प्रदेश सरकार के समर्थन में, भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन के व्यापक ढांचे के तहत किया गया।
उद्घाटन सत्र में एआई-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
उद्घाटन सत्र में भारत और उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक सेवा वितरण, विशेषकर स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने में एआई की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई। साथ ही एआई के नैतिक, सुरक्षित और समावेशी उपयोग को सुनिश्चित करने की रणनीतियों पर भी मंथन किया गया।
सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, वाणिज्य एवं उद्योग तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक, आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा और चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह उपस्थित रहे।
इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह, एनआईसी के महानिदेशक, इंडियाएआई के सीईओ और यूपी सरकार के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रमुख सचिव अनुराग यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री योगी ने यूपी एआई मिशन की घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि फरवरी 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में होने वाला भारत एआई प्रभाव शिखर सम्मेलन 2026 देशभर में एआई के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण मंच होगा। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान समयबद्ध और प्रौद्योगिकी-आधारित मॉडल से ही संभव है।
मुख्यमंत्री ने यूपी एआई मिशन की घोषणा करते हुए बताया कि इसके लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है, जिससे राज्य में मजबूत एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जाएगा।
भारत को एआई में वैश्विक नेता बनाने का संकल्प
केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि भारत तेजी से डिजिटल तकनीकों और एआई में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश एक उभरता हुआ तकनीकी गंतव्य बन चुका है, जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर दूर-दराज क्षेत्रों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार एआई के लाभ हर नागरिक तक पहुंचाने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा, डीपफेक और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियों पर भी सक्रियता से काम कर रही है।
स्वास्थ्य सेवाओं में एआई से बदलाव
उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा वितरण में ऐतिहासिक परिवर्तन हो रहा है। एआई प्रारंभिक निदान, क्रिटिकल केयर और डेटा-आधारित नीतिगत निर्णयों में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने प्रदेश को एआई-नेतृत्व वाली स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की प्रतिबद्धता जताई।
आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि एआई और स्वास्थ्य सेवाओं का संगम प्रदेश में जनकल्याण की नई संभावनाएं खोल रहा है। राज्य का लक्ष्य तकनीक के माध्यम से सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।
62 एआई और डेटा लैब स्थापित होंगी
सम्मेलन के पहले दिन इंडियाएआई मिशन ने उत्तर प्रदेश में 62 एआई और डेटा लैब स्थापित करने की घोषणा की। इससे एआई अनुसंधान, कौशल विकास और तैनाती क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। इस संबंध में इंडियाएआई मिशन और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर भी हस्ताक्षर किए गए।
अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवाओं में लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का समाधान कर सकता है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में एक उदाहरण बन सकता है।
वैश्विक विशेषज्ञों की भागीदारी
क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने एआई-सक्षम निदान, डिजिटल स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीमेडिसिन और कार्यबल सशक्तिकरण जैसे विषयों पर चर्चा की।
कार्य समूह सत्रों में वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए एआई के व्यावहारिक उपयोग और प्रस्तावित वैश्विक एआई प्रभाव पुरस्कारों के स्वरूप पर भी विचार हुआ।
भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व की झलक
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय एआई प्रभाव सम्मेलन 2026 और वैश्विक कार्य समूह बैठक ने जिम्मेदार, समावेशी और प्रभावशाली एआई के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वैश्विक नेतृत्व को और मजबूत किया।
