नई दिल्ली/कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 14 वर्षीय किशोरी के साथ हुए कथित सामूहिक बलात्कार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस जघन्य घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
दोषियों में पुलिसकर्मी का नाम आने से हड़कंप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घृणित अपराध के आरोपियों में से एक उत्तर प्रदेश पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताया जा रहा है। आयोग ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मीडिया में आई खबरें सच हैं, तो यह मानवाधिकारों के उल्लंघन का एक अत्यंत गंभीर मामला है। विशेष रूप से तब, जब रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हों।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 5 जनवरी 2026 की रात की है। पीड़ित किशोरी को उसके घर के पास से ही अगवा कर लिया गया था। आरोपी उसे रेलवे लाइन के पास एक सुनसान जगह ले गए, जहाँ दो लोगों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार (Gangrape) की वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद जब डरा-सहमा परिवार पीड़िता को लेकर भीमसेन पुलिस चौकी पहुंचा, तो वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने मदद करने के बजाय उन्हें वहां से भगा दिया। हार मानकर परिवार सचेंडी थाना पहुँचा, जहाँ कार सवार अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण और बलात्कार का मामला दर्ज किया गया।
मानवाधिकार आयोग की सख्ती
आयोग ने साफ किया है कि इस मामले में पुलिस की लापरवाही और आरोपियों की संलिप्तता की गहन जांच होनी चाहिए। 15 जनवरी 2026 को जारी नोटिस के माध्यम से DGP से पूछा गया है कि:
- अब तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई है?
- क्या आरोपी पुलिसकर्मी की पहचान कर उसे गिरफ्तार किया गया है?
- पीड़ित परिवार को क्या सुरक्षा और सहायता प्रदान की गई है
