नई दिल्ली। देश की आन-बान और शान के प्रतीक ‘लाल किले’ की सुरक्षा अब अभेद्य होने जा रही है। 2005 के आतंकी हमले और हाल ही में 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम विस्फोट के बाद, आखिरकार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला सुरक्षा एजेंसियों और ASI के बीच पिछले सात सालों से चल रहे गतिरोध के खत्म होने के बाद लिया गया है।
आतंकी हमले के बाद बदली स्थिति
लाल किले की सुरक्षा का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में था। इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और दिल्ली पुलिस लगातार कैमरों की मांग कर रही थी, लेकिन ASI को डर था कि खुदाई या ड्रिलिंग से ऐतिहासिक ढांचे को नुकसान पहुँच सकता है। हालांकि, 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए आतंकी हमले ने सुरक्षा प्राथमिकताओं को बदल दिया। इस हमले की गंभीरता को देखते हुए गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठकों के बाद एएसआई ने अपनी आपत्तियां वापस ले लीं।
पहले चरण में 150 ‘तीसरी आंख’ का पहरा
सुरक्षा योजना के अनुसार, पहले चरण का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है:
- 150 हाई-टेक कैमरे: पूरे परिसर में 150 सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो हर संकीर्ण और अंधेरे कोने पर नजर रखेंगे।
- हाई-मास्ट फ्लडलाइट्स: किले के आसपास के पार्कों और खुले मैदानों में तेज रोशनी वाली फ्लडलाइट्स लगाई जा रही हैं ताकि रात के समय भी निगरानी सटीक रहे।
- संयुक्त निगरानी: इन कैमरों की फीड दिल्ली पुलिस और सीआईएसएफ (CISF) के कंट्रोल रूम को रियल-टाइम में मिलेगी।
एजेंसियों के बीच समन्वय
इस बड़े कदम को अमलीजामा पहनाने के लिए गृह मंत्रालय, आईबी, दिल्ली पुलिस, सीआईएसएफ और एएसआई के अधिकारियों के बीच कई दौर की वार्ता हुई। अधिकारियों का कहना है कि कैमरों की फिटिंग इस तरह की जाएगी कि ऐतिहासिक दीवारों या कलाकृतियों को कोई नुकसान न पहुंचे।
सुरक्षा घेरा होगा सख्त
लाल किले की आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है, जबकि बाहरी घेरे की सुरक्षा दिल्ली पुलिस संभालती है। कैमरों के लगने से दोनों एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर होगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा।
अधिकारियों के अनुसार, यह कार्य जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा, जिससे भविष्य में लाल किले पर किसी भी तरह के आतंकी खतरे को कम किया जा सके।
