नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक पार्वती गिरि की जन्म शताब्दी के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके अतुलनीय साहस और आजादी के बाद समाज सेवा के प्रति उनके समर्पण को याद किया।
‘X’ पर साझा किया संदेश
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संदेश में लिखा, “पार्वती गिरि जी की जन्म शताब्दी पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ आंदोलन में सराहनीय भूमिका निभाई। सामुदायिक सेवा के प्रति उनका समर्पण और स्वास्थ्य सेवा, महिला सशक्तिकरण व संस्कृति जैसे क्षेत्रों में उनके कार्य उल्लेखनीय हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी याद दिलाया कि हाल ही में अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में भी उन्होंने पार्वती गिरि के जीवन और उनके संघर्षों पर चर्चा की थी, ताकि देश की युवा पीढ़ी उनके योगदान से प्रेरणा ले सके।
क्यों खास हैं पार्वती गिरि?
ओडिशा के संबलपुर में 19 जनवरी 1926 को जन्मी पार्वती गिरि को ‘ओडिशा की मदर टेरेसा’ के रूप में जाना जाता है। उनके जीवन के कुछ प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:
- कम उम्र में क्रांति: मात्र 16 साल की उम्र में उन्होंने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जेल भी गईं।
- सामाजिक उत्थान: आजादी के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन अनाथों, गरीबों और कुष्ठ रोगियों की सेवा में समर्पित कर दिया।
- नारी शक्ति की प्रतीक: उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और बुनाई को बढ़ावा दिया।
विरासत को सम्मान
सरकार द्वारा पार्वती गिरि की जन्म शताब्दी को बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें दी गई यह श्रद्धांजलि देश के उन ‘अनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को मुख्यधारा में लाने के प्रयासों का हिस्सा है, जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में चुपचाप अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
