कोलकाता। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जिलाधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। बुधवार को राज्य सचिवालय ‘नबन्ना’ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अक्षशः पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
बैठक में अचानक पहुँचीं मुख्यमंत्री
राज्य सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती की अध्यक्षता में जिलाधिकारियों की बैठक चल रही थी, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अप्रत्याशित रूप से शामिल हुईं। उन्होंने मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान आम जनता को हो रही परेशानियों पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार करने को कहा।
‘तार्किक विसंगतियों’ के नाम पर न हो परेशानी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विशेष रूप से आगाह किया कि तार्किक विसंगतियों (Logical Inconsistencies) के बहाने लोगों को अनावश्यक रूप से असुविधा न पहुँचाई जाए। उन्होंने कहा, “एसआईआर की सुनवाई के दौरान लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को केवल तकनीकी चश्मे से नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।”
दस्तावेजों और रसीदों पर कड़े निर्देश
ममता बनर्जी ने जिलाधिकारियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
- वैध दस्तावेज: सुप्रीम कोर्ट द्वारा वैध घोषित किए गए सभी दस्तावेजों को सुनवाई के दौरान बिना किसी अपवाद के स्वीकार किया जाए।
- रसीद अनिवार्य: दस्तावेज जमा करने के बाद संबंधित व्यक्ति को रसीद जारी करना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
- वैकल्पिक व्यवस्था: जो मतदाता निर्धारित तिथियों पर सुनवाई में शामिल होने में असमर्थ हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए ताकि उनका लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित न हो।
लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री के इन निर्देशों को मतदाता सूची की शुचिता बनाए रखने और पात्र मतदाताओं के नाम कटने से बचाने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री इस पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रख रही हैं।
