बाराबंकी । बाराबंकी जिले के ऐतिहासिक एवं पौराणिक महत्व वाले लोधेश्वर महादेव धाम का कायाकल्प अब तेज़ी से हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पर्यटन विभाग द्वारा ₹48.79 करोड़ की लागत से धाम को आधुनिक धार्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी और लोधेश्वर धाम काशी की तर्ज पर विकसित प्रमुख तीर्थस्थल के रूप में नई पहचान बनाएगा।
पर्यटन विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत लगभग 12,980 वर्गमीटर क्षेत्र में हाईटेक विजिटर फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स, भव्य प्रवेश द्वार, 652 मीटर लंबा कवर्ड कॉरिडोर, क्लॉक रूम, मेडिकल सेंटर, कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, सीसीटीवी निगरानी, सिक्योरिटी स्टाफ हॉल, पेंट्री, नौ दुकानें और आकर्षक लैंडस्केपिंग का निर्माण किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुरुषों और महिलाओं के लिए 26-26 शौचालय तथा दिव्यांगजनों के लिए चार विशेष शौचालय बनाए जाएंगे। साथ ही पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा।
निर्माण कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस के परियोजना प्रबंधक देवव्रत पवार ने बताया कि भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अप्रैल 2026 से निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वर्तमान में मुख्य भवन की फाउंडेशन और पाइलिंग का कार्य जारी है। परियोजना को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप लोधेश्वर महादेव धाम को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है। जिला प्रशासन परियोजना की नियमित निगरानी कर रहा है ताकि तय समय में गुणवत्तापूर्ण निर्माण पूरा हो सके। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं व्यापार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
महाभारत काल से जुड़ी है आस्था
रामनगर तहसील के महादेवा गांव में घाघरा नदी के तट पर स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने यहां महायज्ञ किया था, जिसका प्रमाण आज भी मौजूद पांडव कूप है। यहां स्थापित शिवलिंग भारत के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में से एक माना जाता है। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर लाखों श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं।
परियोजना पूरी होने के बाद लोधेश्वर महादेव धाम न केवल आस्था का प्रमुख केंद्र होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर भी एक नई पहचान स्थापित करेगा।
