नई दिल्ली/लखनऊ: देश के कई हिस्सों में सूर्यदेव के कड़े तेवर और लू (Heatwave) की मार झेल रहे लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से मौसम का मिजाज बदलने वाला है। अगले 48 घंटों में उत्तर भारत सहित देश के कई राज्यों में आंधी और बारिश की गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
28 से 30 अप्रैल के बीच दिखेगा असर
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, 27 अप्रैल की शाम से ही मौसम में बदलाव के संकेत मिलने लगेंगे। 28 से 30 अप्रैल के बीच यह सिस्टम और भी सक्रिय हो जाएगा। इस दौरान 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बिजली कड़कने और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि (Hailstorm) की भी आशंका है। इससे पारे में गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे लोगों को झुलसाने वाली गर्मी से निजात मिलेगी।
उत्तर प्रदेश: आंधी और बारिश की चेतावनी
उत्तर प्रदेश में 28 अप्रैल से मौसम में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसे खतरे हो सकते हैं।
दिल्ली-एनसीआर और बिहार का हाल
- दिल्ली-एनसीआर: यहां दिन के समय लू का असर बना रहेगा और तापमान 43^\circ\text{C} से 45^\circ\text{C} तक जा सकता है। हालांकि, शाम होते ही बादलों की आवाजाही और हल्की बूंदाबांदी से शाम सुहानी होने के आसार हैं।
- बिहार: राज्य के कुछ हिस्सों में लू का प्रकोप जारी रहेगा, लेकिन पूर्वी चंपारण और सीतामढ़ी जैसे जिलों में बारिश और ओलावृष्टि को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
अन्य राज्यों में मौसम की स्थिति
- राजस्थान व मध्य प्रदेश: इन राज्यों में भी 29 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है, जिससे तापमान में कमी आएगी।
- पहाड़ी राज्य: उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी का अनुमान है।
- पूर्वोत्तर भारत: असम और मेघालय में भारी बारिश को लेकर विभाग ने पहले ही अलर्ट जारी कर दिया है।
सावधानी बरतें
मौसम विभाग ने आम जनमानस से अपील की है कि आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहें। बिजली कड़कने की स्थिति में पेड़ों के नीचे या खुले मैदानों में न जाएं। किसानों को भी सलाह दी गई है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें।
