लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘ब्राह्मण प्रेम’ को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा अपनी संकीर्ण जातिवादी राजनीति और चुनावी स्वार्थ के लिए ‘‘गिरगिट की तरह रंग बदलती रहती है।’’
मायावती ने कहा कि अब जब ब्राह्मण समाज के लोग बसपा से तेजी से जुड़ रहे हैं और पार्टी की ओर से इसी आधार पर उम्मीदवार बनाए जा रहे हैं, तो सपा घबरा गई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के पीडीए की नई व्याख्या पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि सपा ने अब ‘पी’ का मतलब ‘पंडित’ बताना शुरू कर दिया है। मायावती के मुताबिक, यह सपा की राजनीतिक रणनीति और छलावे का प्रमाण है।
दरअसल, पांच अगस्त को समाजवादी नेता दिवंगत जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था कि पीडीए में ‘पी’ का मतलब ‘पंडित’ है। इसी बयान को लेकर मायावती ने सपा पर निशाना साधा।
बसपा प्रमुख ने कहा कि इस तरह की ‘‘छल की राजनीति’’ से किसी व्यक्ति को कुछ समय के लिए राजनीतिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे पूरे समाज का भला नहीं हो सकता। उन्होंने सर्वसमाज के लोगों से ऐसी राजनीति से सावधान रहने की अपील की।
मायावती ने कहा कि सर्वसमाज के हित में ऐसी संकीर्ण जातिवादी राजनीति से दूरी बनाना समय की मांग है। उन्होंने दावा किया कि बसपा सभी वर्गों के हित और सामाजिक समरसता की राजनीति को प्राथमिकता देती है।
