उन्नाव/बीघापुर। गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) यात्रा के अंतर्गत शनिवार को उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर, परमपूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ‘1008’ जी महाराज बीघापुर स्थित संदोही देवी मंदिर परिसर पहुंचे, जहां उनका श्रद्धा और भक्ति के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान हजारों श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं और क्षेत्रवासियों की मौजूदगी में पूरा मंदिर परिसर वैदिक मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार एवं पूजन-अर्चन के साथ हुआ। इसके बाद माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र भेंट कर शंकराचार्य जी का सम्मान किया गया। श्रद्धालुओं ने उनके दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अपने उद्बोधन में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की आधारशिला हैं। उन्होंने गौरक्षा को जनआंदोलन बनाने, गौसेवा को प्रत्येक नागरिक का दायित्व मानने तथा समाज में धार्मिक चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर शंकराचार्य जी ने गविष्ठि (गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध) अभियान के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र 166, भगवंतनगर के समाजसेवी अंकित सिंह परिहार को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया। घोषणा के बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने तालियों और जयघोष के साथ उनका स्वागत किया।
अंकित सिंह परिहार ने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी का सान्निध्य क्षेत्र के लिए सौभाग्य और प्रेरणा का विषय है। उनके आशीर्वचन समाज को धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल सभी संतों, श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं ने गौरक्षा, सामाजिक समरसता और सनातन संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया। शंकराचार्य जी के मंगल आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि और हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
