नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात में ‘सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट’ द्वारा प्रकाशित आदि शंकराचार्य के ग्रंथों सहित 24 महत्वपूर्ण पुस्तकों के गुजराती अनुवाद का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने आदि शंकराचार्य के योगदान को याद करते हुए युवाओं को भारतीय सनातन संस्कृति और ज्ञान के अथाह सागर से जुड़ने की प्रेरणा दी।
शंकराचार्य: पैदल चलते विश्वविद्यालय और संवाद की परंपरा के प्रणेता
अमित शाह ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने मात्र अल्पायु में पूरे भारत की पदयात्रा कर एक “पैदल चलते विश्वविद्यालय” की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने केवल ज्ञान नहीं दिया, बल्कि ज्ञान को एक आकार दिया। उन्होंने शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित कर ‘संवाद से समाधान’ (Culture of Debating) की नींव रखी, जो आज भी प्रासंगिक है।
इंटरनेट के दौर में भी कायम है पुस्तकों का महत्व
गृह मंत्री ने आधुनिक तकनीक पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इंटरनेट के आने के बाद लोग सोचते थे कि पुस्तकों का महत्व कम हो जाएगा, लेकिन इन ग्रंथों के प्रकाशन ने इस भरोसे को मजबूत किया है कि नई पीढ़ी आज भी पढ़ना चाहती है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया कि वे आदि शंकराचार्य रचित ‘विवेकचूड़ामणि’ का अध्ययन एक बार अवश्य करें।
सनातन की रक्षा और संगठन का निर्माण

अमित शाह ने बताया कि कैसे शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार मठों की स्थापना कर वेदों और उपनिषदों के संरक्षण की स्थायी व्यवस्था की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में सनातन धर्म की रक्षा के लिए अखाड़ों की स्थापना की और भक्ति, कर्म एवं ज्ञान के समन्वय से मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया।
सस्तु साहित्य मुद्रणालय और स्वामी अखंडानंद का योगदान
केंद्रीय मंत्री ने सामूहिक चरित्र निर्माण में स्वामी अखंडानंद के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वामी अखंडानंद ने श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत, रामायण और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे जटिल ग्रंथों को सरल गुजराती भाषा में उपलब्ध कराकर सनातन धर्म के सार को जन-जन तक पहुँचाया है।
