नई दिल्ली | 14 जनवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में आयोजित पोंगल समारोह में देशवासियों और विशेष रूप से तमिल समुदाय को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने पोंगल को वैश्विक पहचान मिलने पर गर्व व्यक्त किया और कृषि, प्रकृति तथा राष्ट्र निर्माण में तमिल संस्कृति के योगदान को रेखांकित किया।
भाषण की मुख्य बातें:
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- वैश्विक उत्सव बना पोंगल: प्रधानमंत्री ने कहा कि पोंगल अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ‘ग्लोबल फेस्टिवल’ बन चुका है। दुनिया भर में तमिल संस्कृति के प्रेमी इसे पूरे उत्साह के साथ मना रहे हैं।
- साझी विरासत का प्रतीक: पीएम ने तमिल संस्कृति को दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक बताया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह संस्कृति केवल तमिलनाडु की नहीं, बल्कि पूरे भारत और संपूर्ण मानवता की साझी विरासत है।
- किसानों का सम्मान: ‘तिरुक्कुरल’ का संदर्भ देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिल संस्कृति में किसान को जीवन का आधार माना गया है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में किसानों की भूमिका की सराहना की और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में उनके योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
- सस्टेनेबल खेती और युवाओं का आह्वान: प्रधानमंत्री ने ‘मिशन लाइफ’, ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसे अभियानों का जिक्र करते हुए प्राकृतिक खेती (Natural Farming) पर जोर दिया। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि तमिलनाडु के युवा अपनी प्रोफेशनल लाइफ छोड़कर आधुनिक और टिकाऊ खेती को अपना रहे हैं।
”हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि हमारी थाली भी भरी रहे, हमारी जेब भी भरी रहे, और हमारी धरती भी सुरक्षित रहे।” — प्रधानमंत्री मोदी
सांस्कृतिक एकता पर जोर
प्रधानमंत्री ने पिछले एक वर्ष में तमिल संस्कृति से जुड़े अपने अनुभवों को साझा किया, जिसमें गंगईकोंडा चोलपुरम मंदिर में पूजा, काशी तमिल संगमम् और पंबन ब्रिज का लोकार्पण शामिल है। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना पोंगल जैसे पर्वों से और अधिक सशक्त होती है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन “वाळ्गा तमिळ्, वाळ्गा भारतम्!” (तमिल अमर रहे, भारत अमर रहे) के उद्घोष के साथ किया।
