नई दिल्ली | 14 जनवरी, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मकर संक्रांति के पावन अवसर पर समस्त देशवासियों को बधाई दी। इस दौरान उन्होंने भारतीय संस्कृति की समृद्धि और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए एक विशेष संस्कृत सुभाषितम (श्लोक) भी साझा किया।
सांस्कृतिक एकता और समृद्धि का प्रतीक
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि मकर संक्रांति का पर्व भारतीय परंपराओं की गहराई को दर्शाता है। यह त्योहार सद्भाव, समृद्धि और एकजुटता की भावना का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तिल और गुड़ की मिठास हर भारतीय के जीवन में प्रसन्नता और सफलता लेकर आएगी।
संस्कृत श्लोक के जरिए मांगी सूर्य देव की कृपा
आध्यात्मिक महत्व पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ (Twitter) पर भगवान सूर्य की स्तुति में एक श्लोक साझा किया:
सूर्यो देवो दिवं गच्छेत् मकरस्थो रविः प्रभुः।
उत्तरायणे महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्॥
इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण होने के पुण्य फल की महत्ता बताई। उन्होंने सूर्य देव से राष्ट्र के कल्याण, सबके सुख-सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की।
विविधता में एकता का उत्सव
प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि संक्रांति का यह पावन अवसर देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है। यह विविधता ही हमारी संस्कृति की असली ताकत है।
