नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा में लगातार सातवें दिन भी विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। विपक्ष की नारेबाजी और शोर-शराबे के बीच सरकार ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विकास (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया, जिसके बाद कार्यवाही बुधवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
अपराह्न दो बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। इस बीच उपसभापति हरिवंश ने व्यवस्था बनाए रखने की अपील की और एमएसएमई मंत्री जीतन राम माझी को विधेयक प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बावजूद ध्वनिमत से विधेयक पेश करने की अनुमति दी गई।
हंगामे के दौरान उपसभापति ने विपक्ष से कहा कि यदि व्यवधान जारी रहेगा तो सदन का कामकाज प्रभावित होगा। स्थिति सामान्य न होने पर उन्होंने सदन की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी।
कार्यसूची में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारक अधिनियम में संशोधन से संबंधित विधेयक पर चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव भी शामिल था। ‘वंदे मातरम् विधेयक’ के नाम से चर्चित इस प्रस्ताव पर भी लगातार जारी हंगामे के कारण चर्चा नहीं हो सकी।
इससे पहले सुबह की बैठक में भी विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में बयान देने की मांग करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के कारण शून्यकाल और प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं चल सकी तथा सदन को दोपहर दो बजे तक स्थगित करना पड़ा।
मानसून सत्र के सातवें दिन तक राज्यसभा में नियमित विधायी कार्य लगभग पूरी तरह बाधित रहा। लगातार हो रहे विरोध के कारण अब तक न तो प्रश्नकाल और न ही शून्यकाल सुचारु रूप से संचालित हो सका है। विपक्ष अपने रुख पर कायम है, जबकि सरकार निर्धारित विधायी कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।
