लखनऊ। स्वाधीनता संग्राम सेनानी और अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी के 91वें बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अमीनाबाद स्थित झंडेवाला पार्क में उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अमर शहीद के त्याग, साहस और देशभक्ति को नमन करते हुए उनके योगदान को स्वतंत्रता संग्राम का स्वर्णिम अध्याय बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 23 अगस्त 1935 को मात्र 32 वर्ष की आयु में भारत माता के महान सपूत गुलाब सिंह लोधी ने ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती देते हुए इसी पार्क में भारत का तिरंगा फहराया था। उस दौर में तिरंगा देश की स्वाधीनता का प्रतीक था। ब्रिटिश सरकार ने उनके इस साहस का जवाब गोलियों से दिया और गुलाब सिंह लोधी देश की आजादी के लिए शहीद हो गए।
उन्होंने कहा कि गुलाब सिंह लोधी भले ही देश के लिए अपना जीवन न्योछावर कर गए, लेकिन अपने बलिदान से आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वाधीनता और राष्ट्रभक्ति का एक स्वर्णिम पृष्ठ छोड़ गए। उनके बलिदान के महज 12 वर्ष बाद भारत ब्रिटिश दासता से मुक्त होकर स्वतंत्र राष्ट्र बना।
किसान परिवार में जन्मे, आजादी के लिए न्योछावर किया जीवन
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी का जन्म वर्ष 1903 में उन्नाव जिले के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन से ही उनके भीतर देश की आजादी के प्रति गहरी भावना थी। इसी जज्बे के साथ उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और लखनऊ पहुंचकर देश की स्वाधीनता के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश की जनता की ओर से वह अमर शहीद की पुण्य स्मृतियों को नमन करते हैं। उनके जीवन और बलिदान से आज की युवा पीढ़ी को देशभक्ति, साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है।
उन्नाव में भी अमर शहीद के नाम पर हुए कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी की स्मृतियों को जीवंत बनाए रखने के लिए प्रदेश सरकार ने उन्नाव जिले में पार्क, स्वास्थ्य केंद्र और पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय का नामकरण उनके नाम पर किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार स्वतंत्रता संग्राम में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले सभी अमर बलिदानियों के पुण्य स्मरण को जीवंत बनाए रखने और नई पीढ़ी को उनके योगदान से परिचित कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर मौजूद लोगों ने भी अमर शहीद गुलाब सिंह लोधी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके बताए राष्ट्रभक्ति एवं त्याग के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
