लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए मंगलवार 29 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा और इसी दिन मतगणना भी होगी। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू होते ही उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने अपने सभी विधायकों को लखनऊ में रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं भारतीय जनता पार्टी की कोर कमेटी की बैठक हो चुकी है और पार्टी उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, जिनमें फिलहाल 397 सदस्य हैं और छह सीटें रिक्त हैं। मौजूदा संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता मतों की जरूरत होगी। राज्यसभा चुनाव में विधायक वरीयता क्रम के आधार पर मतदान करते हैं, इसलिए उम्मीदवारों की संख्या और दलों के पास उपलब्ध अतिरिक्त वोट चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 294 विधायक हैं। एनडीए में भाजपा के अलावा अपना दल (सोनेलाल), राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और निषाद पार्टी शामिल हैं। वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास मिलाकर करीब 103 विधायक बताए जा रहे हैं। संख्या बल के आधार पर दोनों प्रमुख खेमे अपनी-अपनी सीटों को सुरक्षित करने के साथ अतिरिक्त सीटों के लिए भी रणनीति बना रहे हैं। चुनाव में अतिरिक्त सीटों के लिए दूसरी वरीयता के वोट, छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन तथा मतदान के दौरान विधायकों की पसंद महत्वपूर्ण हो सकती है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। वर्तमान में इन 10 सीटों में आठ भाजपा, एक समाजवादी पार्टी और एक बहुजन समाज पार्टी के पास है। कार्यकाल पूरा करने वाले सदस्यों में भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बनवारी लाल वर्मा, बृजलाल, नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, गीता शाक्य और दिनेश शर्मा के अलावा समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव तथा बहुजन समाज पार्टी के रामजी गौतम शामिल हैं। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले हो रहे राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति पर सभी की नजरें टिकी हैं। 6 अक्टूबर को नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी मैदान में उम्मीदवारों की वास्तविक संख्या और समीकरण स्पष्ट होंगे, जबकि 16 अक्टूबर का मतदान राज्यसभा में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।
