नई दिल्ली/ठाणे | 19 जनवरी 2026
भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा और स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक और बड़ा कदम उठाया है। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देते हुए नौसेना ने ठाणे स्थित मेसर्स सूर्यदीप्ता प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ 03 x 200 टन के ‘नीचे से खुलने वाले बिना इंजन के बजरे’ (Bottom Open Hopper Barges) के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
MSME सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
16 जनवरी 2026 को हुए इस समझौते के जरिए नौसेना ने लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) शिपयार्डों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह कदम न केवल घरेलू जहाज निर्माण इको-सिस्टम को सशक्त करेगा, बल्कि ‘मैरीटाइम इंडिया विज़न-2030’ के लक्ष्यों को हासिल करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
स्वदेशी तकनीक और मानकों का मेल
इन बर्जों (बजरों) का निर्माण भारत सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत किया जा रहा है। इनकी खासियतें निम्नलिखित हैं:
- क्षमता: 200 टन (प्रत्येक)।
- तकनीक: ये बजरे बिना इंजन के होंगे और नीचे से खुलने वाली तकनीक (Bottom Open) से लैस होंगे।
- मानक: इनका निर्माण इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग (IRS) के सख्त वर्गीकरण नियमों के तहत किया जाएगा, जो इनकी गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
क्या है इसका महत्व?
यह अनुबंध रक्षा क्षेत्र में निजी और छोटे उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने के सरकार के प्रयासों का हिस्सा है। नौसेना द्वारा MSME शिपयार्डों को प्रोत्साहित करने से देश के भीतर ही आधुनिक समुद्री उपकरणों के निर्माण की क्षमता विकसित होगी, जिससे भविष्य में विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी।
