- नई दिल्ली। संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार को लोकसभा ने भी इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। नए कानून का उद्देश्य एमएसएमई क्षेत्र को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, विवादों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था करना और छोटे उद्यमों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि संशोधन का मकसद एमएसएमई इकाइयों को भुगतान में होने वाली देरी दूर करना तथा विवाद समाधान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और समयबद्ध बनाना है।
विधेयक की प्रमुख बातें
- सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (CPSEs) को एमएसएमई से खरीदे गए सामान और सेवाओं के बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (TReDS) के माध्यम से करना होगा।
- यदि मध्यस्थता (Conciliation) विफल रहती है, तो 30 दिनों के भीतर मामला आर्बिट्रेशन के लिए भेजना अनिवार्य होगा।
- आर्बिट्रेशन में पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद 90 दिनों के भीतर फैसला सुनाना होगा।
- यदि कोई मामला छह महीने से अधिक लंबित रहता है, तो आपूर्तिकर्ता को निर्णय राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।
सदन में हंगामा, कार्यवाही स्थगित
विधेयक पारित होने के बाद भी लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा। पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटकर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की। उन्होंने पोस्टर और बैनर के साथ विरोध को लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं बताते हुए सदन की गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया।
संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह नियमित रूप से संसद की कार्यवाही में शामिल होते हैं और देर रात तक सदन में मौजूद रहते हैं।
लगातार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। अब सदन की अगली बैठक सोमवार सुबह 11 बजे होगी।
भारत छोड़ो आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि
कार्यवाही की शुरुआत में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के अवसर पर महात्मा गांधी, स्वतंत्रता सेनानियों और देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के ऐतिहासिक आह्वान को याद करते हुए कहा कि यह आंदोलन राष्ट्रीय एकता, सत्य, अहिंसा और लोकतांत्रिक मूल्यों का स्थायी प्रतीक है।
इसके बाद प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया गया, लेकिन विपक्ष ने नीट मुद्दे पर विद्यार्थियों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान की मांग करते हुए हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही।
